तुम आदत में शुमार हो मेरी
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प्याली से उठती भाप
जाने कहाँ खो गई
चाय की उस आखिरी
चुस्की के साथ
मगर चाय का स्वाद
घुल रहा है अब भी
जुबान पर मेरी
और नथुनों में बस रही है
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इतिहास रच सकती हूँ मैं
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मैंने आहुति बनकर देखा, यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है - यह कहना है कानपुर
निवासिनी श्री हरीचन्द्र जी और श्रीमती जमुना देवी जी की योग्य सुपुत्री
सुषमा कुमारी ...