कोई आखिर इतना खा कैसे सकता है?
-
जब कभी घर पर पकोड़ी वाली कढ़ी बनती है तो पकोड़ी तल कर निकलते ही दो चार पकोड़ी
यूँ ही खा जाना आम सी बात है। इसका कोई बुरा भी नहीं मानता बल्कि ऐसा ही होता ...
इतिहास रच सकती हूँ मैं
-
मैंने आहुति बनकर देखा, यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है - यह कहना है कानपुर
निवासिनी श्री हरीचन्द्र जी और श्रीमती जमुना देवी जी की योग्य सुपुत्री
सुषमा कुमारी ...