तुम अनंत हो
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तुम अनंत हो -----------------
मैं रेत पर लिखता हूँ अपना नाम और
फिर देर तक उसमें खोजता हूँ तुमको!
तुम दिखने ही वाली थी कि
आकर एक लहर पोंछ जाती है मु...
इतिहास रच सकती हूँ मैं
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मैंने आहुति बनकर देखा, यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है - यह कहना है कानपुर
निवासिनी श्री हरीचन्द्र जी और श्रीमती जमुना देवी जी की योग्य सुपुत्री
सुषमा कुमारी ...